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कमज़ोरी को ताक़त बना, बसंती बनी एक सफ़ल उद्यमी

33 साल की पोलियो पीड़ित Basanti Rana के लिए, उनके कमजोर पैर एक सफल उद्यमी बनने की राह में कभी बाधा नहीं बने। जहाँ हर कोई शारीरिक विकलांगता की दलील पर घर पर होने की उम्मीद करता है, तो वहीं उन्होनें शिक्षा की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बिज़्नेस शुरू किया। उन्होंने स्नातक की पढ़ाई पूरी की और सिलाई में प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए दाखिला लिया।

लेकिन इससे पहले कि वो अपनी महत्वाकांक्षाओं पर आगे बढ़ सकतीं, उनके परिवार ने उनकी शादी कर दी और उनकी आकांक्षाएं उनके ससुराल के परिवार में घर के कामों तक ही सीमित रहीं। लेकिन चूँकि बसंती अपने सपनों को घरेलू झमेले के अंदर आराम करने देना नहीं चाहती थीं , इसलिए उन्होनें खुद का सिलाई प्रशिक्षण केंद्र शुरू करने का ठान लिया| निश्चित रूप से जो वो चाहती थी, वो इतना आसान नहीं था। उनके परिवार की वित्तीय स्थिति और शारीरिक विकलांगता के बारे में समाज का पक्षपात उनके लिए बड़ी असफलता साबित हुआ|

Basanti Rana
Photo : newspopx.com

Basanti Rana ने अपने कठिन पलों को याद करते हुए कहा कि हालाँकि ये एक समस्या है, लेकिन पोलियो बचपन से ही उनके जीवन का हिस्सा बन गया था। शुरूवाती दिन बहुत कठिन थे, लेकिन उन्होनें अपने संकल्प को कम नहीं होने दिया| उनका परिवार हमेशा उनके प्रयासों का समर्थन करता था। साथ ही शादी ने उनके सपनों को कुछ समय के लिए रोक ज़रूर दिया, लेकिन फिर उन्होनें अपने ससुराल वालों को समझाने की कोशिश की। उनके पति भी उनके लिए शक्ति का एक स्तंभ रहे| उनका कहना है कि जब इतनी चीजें उनके पक्ष में हैं, तो उन्हें शारीरिक विकलांगता के कारण पीछे क्यों हटना चाहिए!

उन्होनें आखिरकार, सरकार की मदद से एक सिलाई प्रशिक्षण केंद्र (tailoring training centre) खोला| जब उन्हें एक क्षेत्र अधिकारी ने एक जागरूकता सृजन कार्यक्रम के संचालन में भारतीय युवा शक्ति ट्रस्ट के बारे में बताया, तो Basanti ने एक उद्यमी (entrepreneur) बनने के लिए अपनी रुचि व्यक्त की। काउंसलिंग और एसटीईपी प्रशिक्षण के एक सत्र के बाद, वित्त अधिकारियों ने उनके प्रस्ताव को व्यवहार्य पाया और इस तरह से उन्हें 1 लाख रुपये का लोन लेने में मदद मिली। जैसे ही उनका लोन पूरा हो गया, वो एक पोस्ट लोन ट्रैनिंग से गुज़री, जिसमें उन्हें प्रोडक्षन मॅनेज्मेंट, मार्केटिंग, और क्वालिटी मॅनेज्मेंट के बारे में पता चला, जिसने उन्हें उनका बिज़्नेस सुचारू रूप से चलाने में मदद की।

आज, Basanti Rana ने जारका में अपनी खुद की गारमेंट मॅन्यूफॅक्चरिंग यूनिट, माँ दुर्गा लेडीज़ टेलर और सिलाई, का सफलतापूर्वक संचालन कर रही हैं| उन्होनें खुद काम करने के अलावा आस-पास के इलाके की 10 लड़कियों को नौकरी पर रखा है। जैसा कि वो आस-पास के क्षेत्रों से वर्क ऑर्डर के माध्यम से अच्छा कारोबार कर रही हैं और जे.पी. हांडलूम जैसे प्रतिष्ठित ब्रांडों के साथ काम कर रही हैं, वो जल्द ही यूनिट का विस्तार करने और ज़्यादा लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य बना रही हैं|

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