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नये साल में नयी मिसाल बने शेखर नायक

नए साल में पार्टी करना और शराब पीना लोकप्रिय है| लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस अवसर को अलग तरीके से मनाने के लिए अनोखा तरीका चुनते हैं। उनमें से एक, भारतीय राष्ट्रीय नेत्रहीन क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान Shekhar Naik भी हैं, जिन्होंने 31 दिसंबर और 1 जनवरी की रात को बेघरों के बीच कंबल बाँटने का नेक काम किया।

पद्म श्री अवॉर्डी, 30 साल के Shekhar Naik ने कलसिपाल्या-केआर मार्केट और आसपास के इलाकों की सड़कों पर मुआयना किया और सड़क किनारे सो रहे लोगों के बीच भोजन के पैकेट और कंबल बाँटे| यह क्षेत्र उन सैकड़ों मजदूरों के साथ जुड़ा हुआ है, जो फ्लाईओवर के नीचे और दुकानों के सामने सोते हैं।

Shekhar Naik
Photo : lifebeyondnumbers.com

Naik, जो कि खुद भी partially visually challenged हैं, ने कहा कि शेयर करना और देखभाल करना नए साल की शुरूआत करने का सबसे अच्छा तरीका है। उन्होनें कहा कि वो सिर्फ सभी के चेहरे पर मुस्कान लाना चाहता था, विशेष रूप से गरीबों के चेहरों पर| ये पूछे जाने पर कि उन्हें परोपकार करने के लिए किसने प्रेरित किया, नाइक ने कहा कि अपने कॉलेज के जीवन के दौरान, वो एक हॉस्टिल में रहे और वहाँ का वार्डन उन्हें हर साल के पहले दिन एक कंबल, नई जोड़ी कपड़े और टूतब्रश दिया करता था| उस वॉर्डन ने ही उन्हें बिना किसी उम्मीद के अच्छा करने के लिए प्रेरित किया।

Naik ने बताया कि वो नेत्रहीन पैदा हुए थे और उनकी माँ ने ही 1994 में उनकी आँखों की रोशनी वापस लाने में मदद की थी| उन्होनें बहुत कम उम्र में ही अपने पिता को खो दिया था, उनकी माँ ने ही उन्हें शिवमोग्गा में स्कूल भेजा|

Shekhar Naik
Photo : lifebeyondnumbers.com

हुलीमावु निवासी Shekhar Naik ने कहा कि जश्न मनाने की तुलना में दलितों की मदद करना ज़्यादा संतोषजनक है। वो एक जिम ट्रेनर के रूप में काम करते हैं और प्रति माह 20,000 रुपये कमाते हैं| उन्होनें कहा कि उनकी आय उनके परिवार का समर्थन करने के लिए पर्याप्त है। उन्होनें बताया कि उनके सबसे अच्छे दोस्त सागर ने उनके सभी फैसलों में उनका साथ दिया और उन दोनों ने जरूरतमंदों की मदद करने के लिए इस दिन के लिए बचत की।उनके इस काम में नाइक के साथ उनकी पत्नी, दो बेटियाँ और सागर थे|

Shekhar Naik विभिन्न स्कूलों में नेत्रहीन छात्रों को प्रशिक्षित कर रहे हैं और उनमें से दो को नागेश ट्रॉफी के लिए भी चुना गया है। उन्होनें कहा कि वो एक खेल अकादमी खोलना चाहते हैं और उन लोगों को प्रशिक्षित करना चाहते हैं जो खेल के प्रति पॅशनेट हैं|

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