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इस रिटायर्ड नेवी कमांडर को लाखों सलाम

शुभम, सतारा स्टेशन पर अपनी ट्रेन के इंतज़ार में था कि एकाएक उसका ध्यान एक आदमी की ओर गया| वो आदमी किसी से फोन पर बोल रहा था कि वो पैसों का इंतज़ाम नहीं कर पा रहा है क्यूंकी एटीएम से सिर्फ़ 2000 रुपये का नोट निकल रहा है और उसके अकाउंट में केवल 1800 रुपये हैं| हालांकि, उस आदमी ने काई बार ट्राइ किया पर पैसे नहीं निकले| इतने में शुभम  ने उस आदमी से बात करना शुरू कर दिया| उसने उस आदमी से पूछा कि वो कहाँ जा रहा है| उस आदमी ने कहाँ ‘जहाँ भी उसे ट्रेन ले जाएगी’! शुभम  की ट्रेन आने में अभी एक घंटा था, इसलिए उसके पास उस आदमी से बात करने का पूरा वक़्त था|

ये थे 1947 में इंदौर में जन्में Mr. Hari Anthony Rao| कभी इंडियन नेवी में lieutenant commander के पद पर रहे और बाद में रिटायर्ड हो गये| उनकी एक प्यारी सी पत्नी कैथरीन और एक बेटा और बेटी थे| उनका बेटा इंडियन नेवी में ही अपनी सेवा दे रहा था, जबकि बेटी एक एरलाइन इंडस्ट्री में थी|

Hari Anthony Rao, इंग्लीश, हिन्दी, कन्नडा, तेलुगु, जर्मन, स्पॅनिश बोलने के साथ-साथ गुजराती, मराठी और उत्तराखंड डाइयलेक्ट्स आसानी से समझ सकते हैं| साल 2000 में उनके परिवार ने एक साथ क्रिस्मस मनाने का सोचा| लेकिन, 22 दिसंबर 2000 को उनकी पत्नी, बेटी और बेटे का एक कार आक्सिडेंट हो गया और तीनों की मौके पर ही दर्दनाक मृत्यु हो गयी| Hari इस घटना से बुरी तरह से टूट गये| वो गहरे डिप्रेशन में चले गये और उन्होनें इन सब ख़यालों को अपने मन से दूर हटाने के लिए हर रोज़ चर्च जाना शुरू कर दिया, ताकि उनका मन और आत्मा दोनों स्थिर रह सकें|

Hari Anthony Rao
Photo : quora.com

साल, 2011 में Hari को केंसर की वजह से अपना दाहिना पैर खोना पड़ा| केंसर के इलाज़ में 45 लाख रुपये का खर्च आया, जिस वजह से उन्हें अपना घर भी बेचना पड़ा| अब, वो एक छोटे से एक कमरे के मकान में अपनी पेंशन के सहारे ज़िंदगी काट रहे हैं| जब उनकी ज़िंदगी में सब कुछ अच्छा था तब सब लोग पूछते थे, पर उस वक़्त उनके रिश्तेदारों तक ने उनका साथ नहीं दिया| हालांकि वक़्त के साथ-साथ उन लोगों ने Hari के घाव भरते देख उनसे सहानुभूति दिखना शुरू कर दिया| लेकिन Hari ने ऐसे लोगों से दूर रहकर ही अपनी ज़िंदगी अकेले काटने का फ़ैसला किया|

उस रात जब शुभम  उनसे मिला तो वो भूखे थे, पर उनके पास पैसे नहीं थे| एक स्टूडेंट होते हुए शुभम के पास इतने पैसे तो नहीं थे कि वो उनकी ज़्यादा हेल्प कर पाए, लेकिन उसने उन्हें भूखा देख वाडा-पाव ऑफर किया|

इन सब बातों के बीच शुभम  उनसे ‘सर’ कहता रहा और Hari उसे माना करते रहे| शायद उनके विनम्र मन को अब किसी स्पेशल इलाज़ की ज़रूरत नहीं थी| शुभम  के ये पूछने पर कि उन्हें बुरा नहीं लगता ? उन्होनें कहा ‘भगवान ने मुझे इतनी शक्ति दी है कि में उन चीज़ों को अप्नाऊँ जो में नहीं बदल सकता और उन चीज़ों को करूँ जिन्हें में बदल सकता हूँ|’ उन्होनें पूरी ज़िंदगी लोगों की सेवा करने में काट दी और इसलिए वो आज अपनी सभी परेशानी भूलकर ज़िंदगी जी रहे हैं|

Hari, एक प्रेरणा हैं कि कोई भी चीज़ इस दुनिया में स्थिर नहीं है, सबकुछ वक़्त के साथ बदलता है| कई परेशानियों के होते हुए भी हमें अपनी ज़िंदगी खुशी से ज़ीनी चाहिए| साथ ही चार्ल्स रेवसोन ने सही कहा है ‘If you cannot change your fate, then change your attitude.’

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