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Kannada School को बचाने के लिए रोज़ 60km पैदल चलती हैं ये माँ-बेटी

जब एक दंपति और उनकी बेटी को दूसरी जगह पर जाना पड़ा, तो उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि Kannada School, जिसमें सिर्फ चार स्टूडेंट्स हैं को बंद नहीं करेंगे। 2nd क्लास की स्टूडेंट और उसकी मां , जो कि रोज़ मज़दूरी कर के कमाती है, 60 किलोमीटर रोज़ travel करते हैं, जिसमें एक घंटे वह पैदल चलकर, मुल्की में  Kilpady Lower Primary School पहुँचते हैं|
एक स्कूल टीचर ने बताया कि अक्टूबर में कक्षा 2 की स्टूडेंट Nishmitha के माता-पिता, जो कि स्कूल के पास रहते थे, ने कुदरी पदुव, कर्कला में अपना एक घर बनाया| स्कूल वालों जब उन्हें बताया कि Nishmita के स्कूल छोड़ने के साथ ही छात्रों की कुल संख्या कम हो जाएगी और स्कूल बंद हो सकता है, तो उन्होंने हर दिन हमारे स्कूल आने का फ़ैसला लिया|

Kannada School
Photo : aolcdn.com

टीचर ने बताया कि स्कूल में एक टीचर और चार स्टूडेंट हैं, जिनमें दो क्लास 5 स्टूडेंट्स शामिल हैं। अगर वो लोग अगले साल स्कूल छोड़ते हैं, तो इस Kannada School में सिर्फ़ दो स्टूडेंट्स होंगे|
टीचर ने बताया कि Nishmita के माता-पिता Vasudev Moolya और Laxmi मजदूर हैं। लड़की और उसकी मां बस स्टैंड तक पहुंचने के लिए लगभग एक घंटे पैदल चलती हैं और फिर कल्पपडी तक पहुंचने के लिए दो बसें लेती हैं। उसके बाद, वो लोग स्कूल तक पहुंचने में करीब 12 मिनट चलते हैं। जब भी लक्ष्मी को स्कूल के पास काम मिलता है, वह काम पर जाती है और अपनी बेटी को घर ले जाने के लिए उस वक़्त तक आ जाती है, जब काम पास में नहीं मिलता है तो वह अपनी बेटी को स्कूल में छोड़ देती है और फिर दूरदराज़ की जगहों और घरों में काम कर के शाम को वापस आती है। वह हर रोज़ बस की सवारी पर करीब 70 रुपये खर्च करती है, लेकिन इसके बावजूद, वो लोग Kannada School आ रहे हैं|

टीचर, जो कि मंगलूरु से है, लगभग 35 किमी दूर स्कूल तक पहुंचने के लिए कम से कम छह बसों को बदलता है|गाँव वालों के मुताबिक, स्कूल करीब आधा सौ साल पुराना है और आसपास के इलाक़ों में एकमात्र education institute है| हालांकि, जगह के आसपास English medium schools की बढ़ती संख्या ने Kannada Primary School को पीछे छोड़ दिया है। कई ocassions पर, स्कूल के टीचर्स आस-पास के घरों में गये और गांववालों से अनुरोध किया कि वे अपने बच्चों को स्कूल बंद होने से बचाने के लिए भेज दें। हालांकि, कोई positive response नहीं आया|

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