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आँखों के बिना Inderjeet रखेंगी लोगों का हिसाब

सात साल पहले एक एसिड अटैक में अपनी दोनों आँखों की रौशनी खो देने के बावजूद 30 साल की मोहाली की Inderjeet Kaur ने एक बैंकर के रूप में अपने जीवन की नई पारी शुरूवात की है|

कौर, जिनकी पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के समक्ष याचिका के कारण पंजाब और हरियाणा राज्यों में एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए वित्तीय सहायता के लिए नीतियां बनाई गई थीं, कैनरा बैंक के दिल्ली कार्यालय में एक क्लर्क के रूप में शामिल हो गई हैं।

चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों पर चोटों के अलावा, Inderjeet Kaur ने दिसंबर 2011 के हमले में अपनी आंखों की रोशनी भी खो दी थी। उन्होनें बताया कि उनकी मां को छोड़कर, कोई अन्य रिश्तेदार या उनके भाई ने भी अपराधियों के खिलाफ उनकी लड़ाई में उनका समर्थन नहीं किया। उन्हें अपनी पढ़ाई भी छोड़नी पड़ी और उन्हें पूरी तरह से अलग समझा जाने लगा| उन्होनें बताया कि वो हमेशा रोती रहती थीं|

ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने उन्हें परिवार और समाज पर बोझ कहना शुरू कर दिया| इसी के बाद उन्होनें ज़िंदगी में कुछ करने की ठानी और देहरादून में नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर विजुअली हैंडीकैप्ड में शामिल हो गयीं|

Inderjeet Kaur
Photo : timesofindia.Indiatimes.com

Inderjeet Kaur ने देहरादून में एक नया मोड़ लिया, जहाँ उन्होनें ऑडियो रिकॉर्डिंग के माध्यम से पढ़ने की तकनीक सीखी और 2016 में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वो बैंकिंग सेवा की परीक्षा में दो बार उपस्थित हुई और आखिरकार जून 2018 में अपने तीसरे प्रयास में उन्होनें परीक्षा पास की। दृष्टिबाधित श्रेणी के तहत चयनित कौर को दिल्ली में तैनात किया गया है|

मोहाली के मरौली कलां गाँव की मूल निवासी, Inderjeet Kaur, ज़ीरकपुर के मंजीत सिंह के मैरेज प्रपोज़ल को रिजेक्ट करने से पहले एक सामान्य कॉलेज स्टूडेंट की तरह ही थीं| लेकिन प्रपोज़ल ठुकराने से गुस्सा हुए मंजीत ने उनके घर आकर उन पर तेजाब डाल दिया, जिसके परिणाम स्वरूप कौर की आंखों की रोशनी खोने के अलावा, चेहरे, गर्दन, हाथों और शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर घाव हो गए।

हमले से पहले, Inderjeet Kaur बच्चों को पढ़ाती थी, लेकिन उनकी आँखों की रौशनी जाने के बाद उनका आजीविका का एकमात्र स्रोत भी बंद हो गया| प्लास्टिक सर्जरी जैसे विशिष्ट उपचार का खर्च उठाने में असमर्थ, उन्होनें पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, अपने इलाज और पुनर्वास के लिए मुआवजे की मांग की। उनकी याचिका के जवाब में, पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ ने एसिड अटैक पीड़ितों को मुफ्त इलाज और मुआवजा देने पर सहमति जताई।

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