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Sandhya और Rakhi जैसी लड़कियाँ ला रही हैं समाज़ में बदलाव

Sandhya 11 साल की थी, जब उसने उसी की उम्र की एक लड़की की एक टीनेज लड़के से शादी होते हुए देखी थी| उसे आज भी उस बाल दुल्हन का दुखी चेहरा याद है, जो पढ़ाई करना चाहती थी लेकिन बाद में बड़ी दहेज की मांग के डर से उसके कूड़ा बीनने वाले माँ-बाप को उसकी शादी के लिए मजबूर होना पड़ा।

बिहार के नालंदा जिले में अपने गांव में घूमते हुए, Sandhya इस बारे में चिंतित थी कि उसकी किस्मत भी ऐसी ही तो नहीं है| वो, इसे रोकने के लिए NGO Waste Pickers Welfare Foundation की हमेशा से आभारी है। चिंता से दूर class VII की ये स्टूडेंट अब classical dance सीखना चाहती है और actress बनना चाहती है|

Sandhya and Riya
Photo : timesofindia.indiatimes.com

Waste Pickers Welfare Foundation ने झुग्गियों के ढेर के बीच एक इनफॉर्मल स्टडी सेंटर शुरू किया, जहां Sandhya का परिवार रहता था। इस बात को सही करने के लिए कि लोग उनकी बात समझ गये हैं, एनजीओ ने युवा लड़कियों के माता-पिता को hand-written pledge पर हस्ताक्षर करने के लिए राजी करना शुरू किया कि वो 18 साल की उम्र से पहले अपनी बेटियों की शादी नहीं करेंगे|

कुछ माता-पिता सहमत हुए, कुछ ने verbal assurances दिए| लोकल स्कूलों में पेरेंट्स-टीचर मीटिंग में लोगों को शिक्षा का महत्व समझाने जैसे निरंतर कामों के साथ प्रयास किया गया| एनजीओ के फाउंडर बाली चरन ने कहा कि उड़ान भरने के इस एक्सपेरिमेंट ने अब 15 साल के संघर्ष के बाद रिज़ल्ट्स देना शुरू कर दिया है|

Sandhya and Riya
Photo : imgur.com (representable image)

झुग्गियों के ढेर के बीच रहने वाली 12 साल की Rakhi जानती है कि बाल-विवाह क्या है| उससे ये पूछे जाने आर कि वो 18 साल से पहले शादी करेगी, तो हमेशा कहती है ‘नहीं’|

Rakhi बड़ी होकर पुलिस में जाना चाहती है। Sandhya और Rakhi की तरह, गाजियाबाद में 600- ऑड परिवारों के इस रैग्पिकर्स की कॉलोनी में कई लड़कियां शिक्षा की शक्ति और जागरूकता से लाभान्वित हुई हैं|

Sandhya and Riya
Photo : dhakatribune.com (representable image)

चरन ने कहा कि 200 से ज़्यादा बच्चों ने सरकारी संचालित प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में campaign के लिए रिजिस्टर्ड किया है|

एनजीओ के फाउंडर ने कहा कि माता-पिता के साथ monthly meetings आयोजित की जाती हैं, जब आश्वासन दिया जाता है कि जो लोग अपने गांवों में वापस जा रहे हैं वो अपनी लड़कियों को विवाह में नहीं देंगे। कुछ पेरेंट्स ने उन्हें written assurance भी दिया है|

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