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Sunil Mishra का ऑटो-रिक्शा बचा रहा है लाखों ज़िंदगियाँ

कहते हैं मदद करने के लिए सिर्फ़ धन की ज़रूरत नहीं होती, बल्कि उसके लिए एक अच्छे मन की भी ज़रूरत होती है| Sunil Mishra के अनुसार उनका परिवार कई साल पहले उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से पलायन कर के मुंबई आकर बस गया था| दरअसल, उनके गाँव में बहुत ग़रीबी थी और उनके गाँववाले मुंबई आकर अच्छा पैसा कमा रहे थे| इसलिए उनका परिवार भी मुंबई आकर बस गया|

Sunil Mishra
Photo : digitalterminal.com

मुंबई आकर Sunil ने यहीं एक सरकारी अकुल में अड्मिशन ले लिया, लेकिन वो ज़्यादा पढ़ नहीं सके| 12th क्लास में फेल होते ही उन्होनें पढ़ाई छोड़ दी और ऑटो-रिक्शा चलाने लगे| उस वक़्त उनके लिए पढ़ाई से ज़्यादा ज़रूरी पैसा था, जिस वज़ह से उनका परिवार मुंबई गया था|

पिछले 11 साल से वो मुंबई के अंबुजवाडी स्लम इलाक़े में अपनी बीवी और दो बच्चों के साथ रह रहे हैं| उनकी basic needs बहुत मुश्किल से पूरी हो पाती हैं| लेकिन इस बात का असर Sunil Mishra अपने बच्चों के भविष्य पर नहीं पड़ने देना चाहते हैं| इसलिए वो उनकी अच्छी शिक्षा से कभी समझोता नहीं करते हैं| वो चाहते हैं कि उनके बच्चों को कदम-कदम पर उनकी तरह दिक्कतों का सामना ना करना पड़े| साथ ही वो अपनी कमाई का एक निश्चित हिस्सा उत्तर प्रदेश में रह रहे अपने माँ-बाप को भी भेजते हैं|

Sunil Mishra
Photo : thelogicalindian.com

उनके अनुसार पैसों की किल्लत ने उन्हें आस-पड़ोस के ज़रूरतमंद लोगों की मदद करने से कभी नहीं रोका| वो जहाँ रहते हैं, वहाँ बहुत पतली गलियाँ हैं, बड़ी गाड़ियाँ तो दूर की बात, कोई भी फोर-वीलर अंदर तक नहीं आ सकते| इसका सबसे बड़ा खामियाज़ा तब भुगतना पड़ता है, जब किसी को एंबुलेंस की ज़रूरत पड़ती है| अपने स्लम एरिया की इस मुसीबत को देखकर उन्होनें ठान लिया कि उनके रहते हुए कोई भी मरीज़ इस वजह से परेशान नहीं होगा|

Sunil Mishra ने अपने ऑटो-रिक्शा को एंबुलेंस में बदल दिया| पिछले 11 सालों में उन्होनें कई मरीज़ों को उनके घर से हॉस्पिटल तक मुफ़्त पहुँचाया है| उनके मुताबिक इस काम को करने के पीछे समाज के लिए कुछ करने की प्रेरणा तो है ही, साथ ही अपनी माँ को लेकर एक किस्सा भी जुड़ा हुआ है|

Sunil Mishra
Photo : thelogicalindian.com

एक बार उनकी माँ को बाइक से गिरने की वजह से काफ़ी चोटें आईं थी और उन्हें जल्दी हॉस्पिटल पहुँचाना था| सौभाग्य से उन्हें टाइम पर एंबुलेंस मिल गयी और वो हॉस्पिटल पहुँच गयी थी| Sunil मानते हैं कि एंबुलेंस की वजह से ही उनकी माँ की जान बच सकी थी|
इसी घटना के बाद उन्होनें सोच लिया था कि वो ज़रूरतमंद लोगों की मदद करेंगे, चाहे उन्हें कोई भी परेशानी झेलनी पड़े|

उनका कहना है कि उपरवाले ने मदद करने का पूरा खाका ही तैयार कर दिया था, उन्हें बस अपना रोल पूरा करना था| कई बार आधी रात को भी लोग उनका दरवाज़ा खटखटाते हैं, लेकिन इसी उन्हें कोई परेशानी नहीं होती क्यूंकी वो खुद ही परोपकार करना चाहते हैं| वो खुशी-खुशी अपना ऑटो-रिक्शा चालू कर मरीज़ को हॉस्पिटल पहुँचाते हैं| अच्छी बात ये है कि Sunil Mishra के परिवार के लोग भी उनकी इस मुहिम में उनका पूरा साथ देते हैं|

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