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Y Satyam ने प्रकृति को निःस्वार्थ दिया बड़ा तोहफ़ा

खानपूर्ति, ये शब्द तो आपने ज़रूर सुना होगा। अगर नहीं सुना तो चलिये आपको इसका मतलब बताए देते हैं। इस शब्द का मतलब है बस चलता-चलता सा काम करना, यानि की बस कामचलाऊ किस्म का काम कर देना। अब इस शब्द की चर्चा क्यूँ हो रही है आज भला?

वो इसलिए की अक्सर सरकारी कामों में या कई दफा तो प्राइवेट संस्थानों मे भी ये खानापूर्ति वाला रवैया अपनाया जाता है, मगर आज की नेक कहानी के जो हमारे नायक हैं, इन्होनें ऐसा बिलकुल भी नहीं किया है। अजी खानपूर्ति तो छोड़िए, इन्होनें अपने काम के दायरे के बाहर जा कर भी काम किया, और काम भी ऐसा की मन हरा हो जाये बस।

Y Satyam

इनका नाम है Y Satyam और ये भारत के इंडियन फॉरेस्ट ऑफिसर वाली रैंक पर प्रिन्सिपल चीफ़ कोन्सोर्वर ऑफ फॉरेस्ट हैं, यानि की जंगलों की सुरक्षा करने वाला, उनको बचाने वाला जो नेक काम है ना, वो ये करते हैं। हाँ जी, तो सत्यम साहब पहले रहते थे लखनऊ के चारबाग में। अब जो पहले से वाकिफ है, उन्हें तो पता ही है, पर जिनको नहीं पता, उनको ये बता दें की चारबाग जो है, वो बहुत ही हरियाली वाला इलाका है। अब यहाँ रहने के बाद, Satyam साहब का जाना हुआ मध्य प्रदेश के भोपाल में होशंगाबाद रोड पर स्थित साधना इंकलेव में।

Y Satyam

वहाँ पहुँचने के बाद जो नज़ारा Y Satyam साहब ने देखा, वो इनके लिए किसी कल्चरल शॉक से कम नहीं था। कहने का मतलब ये की जहां एक तरफ चारबाग में हर तरफ हरियाली थी, तो वहीं यहाँ साधना इंकलेव में 12000 स्क्वायर फूट का इलाका सुनसान, वीरान पड़ा था जिसके बीच मे इक्का-दुक्का घर बसे हुए थे। अब यहाँ से “जहां हरियाली, वहीं खुशहाली” मे यकीन रखने वाले सत्यम साहब ने ठान लिया की वो इस इलाके को ऐसा नहीं रहने देंगे। आस-पास रहने वाले कुछ परिवारों की मदद से उन्होने 2015 मे इस जगह का कायापलट शुरू किया और आज तीन साल बाद, इस इलाके में जो हरियाली है, वो तो बस पूछिए ही मत।

Y Satyam

जितनी दूर नज़र जाती है, उतनी दूर बस हरा-हरा ही दिखता है सब। Satyam साहब ने ना सिर्फ 12000 स्क्वायर फूट के इलाके को हरियाली मे तब्दील किया, बल्कि खाली पड़े प्लौट्स के किनारों पर भी पेड़ लगाए। Y Satyam कहते हैं कि इस काम के लिए उन्होने किसी भी सरकारी या प्राइवेट संस्थान से किसी भी प्रकार कि कोई मदद नहीं ली है। हाँ, आस-पास रहने वाले लोगों ने उनको बहुत मदद कि है जिसके लिए वो उनके शुक्रगुजार भी हैं।

वाह Satyam साहब, मजा आ गया आपका काम देख कर, वाकई मन हरा हो जाता है आपकी मेहनत देख कर। हम आपको आपके इस नेक कार्य के लिए बहुत सारी बधाइयाँ और शुभकामनाएँ देते हैं और उम्मीद करते हैं कि आप भविष्य में भी ऐसे बेहतरीन काम करते रहेंगे।

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