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गाँव प्रमुख Hari Prasad बने लड़कियों की हैल्थ के लिए Padman

इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि भारत के ज़्यादातर हिस्सों में मासिक धर्म आज भी Taboo के रूप में माना जाता है। हालांकि, उत्तर प्रदेश में एक गांव के प्रमुख Hari Prasad ने सभी स्टीरियोटाइप तोड़कर एक मील का पत्थर स्थापित किया है| उन्होंने लोगों को यह समझा लिया है कि मासिक धर्म एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है।

Hari Prasad
Photo : timesofindia.indiatimes.com

लखनऊ के खैराही गांव की रहने वाली दो लड़कियाँ ममता और प्रमिला ने अचानक बिना किसी उचित कारण के क्लासस के चलते मध्य में स्कूल आना बंद कर दिया| बाद में गांव के प्रमुख हरि प्रसाद ने पाया कि लड़कियों ने मासिक धर्म के रूप में इतनी प्राकृतिक बात के लिए स्कूल आना छोड़ दिया है| उन्होंने कहा कि लड़कियां जीवन के आधार पर कुछ शर्मिंदा महसूस कर रही थीं|

Hari Prasad
Photo : internet

दो महीने के अंदर Hari Prasad ने पाया कि मासिक धर्म की वजह से स्कूल छोड़ने वाली लड़कियों की संख्या बड़ी थी। तभी उन्होनें फैसला किया कि वह इसे और नहीं होने देंगे| उन्होंने एक campaign शुरू किया और जल्द ही उनके विचारों को वास्तविकता का आकार मिला क्योंकि वह स्वास्थ्य विभाग और यूनिसेफ की परियोजना Garima का हिस्सा बन गए। उन्होंने मिर्जापुर, जौनपुर और सोनभद्र जैसे स्थानों में काम किया। उन्होंने लड़कियों के घर का दौरा किया, उनके माता-पिता से मुलाकात की और उनसे बात की। उन्होनें लड़कियों के पिताओं को समझाया कि अगर औरतों को पीरियड्स नहीं होंगें, तो कोई भी पैदा नहीं होगा। प्रकृति ने उन्हें बनाया है और यह किसी भी तरह से शर्मिंदा होने की बात नहीं है|

Hari Prasad
Photo : internet

Hari Prasad की कड़ी मेहनत का फल उन्हें मिला और उनके गांव की 35 लड़कियां फिर से स्कूल जाने लगीं। उन्होंने न केवल इन लड़कियों को प्रोत्साहित किया बल्कि मासिक धर्म स्वच्छता के लिए सैनिटरी पैड प्रदान करने का भरोसा भी दिया| लड़कियों की मदद करने के लिए उनकी इच्छा ने उन्हें Padman का खिताब भी दिलाया|

उत्तर प्रदेश सरकार के एक अध्ययन से पता चला है कि 60% लड़कियां अपने पीरियड्स के दौरान स्कूल में आना बंद कर देती हैं और आश्चर्यजनक रूप से 19 लाख लड़कियां पढ़ाई छोड़ देती हैं।

कहने की जरूरत नहीं है कि Hari Prasad का ये साहसिक कदम कई लड़कियों को एक नयी ज़िंदगी देने के लिए सराहनीय है|

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