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20 साल के Vipin Rao ने मिट्टी-बिना खेती को बनाया अपना करियर

आजकल यंग्स्टर्स तेज़ी से खेती की तरफ़ आकर्षित हो रहे हैं। कुछ नया करने की चाहत और खेती से प्यार इन्हें इस ओर खींच रहा है| डॉक्टर, इंजीनियर, मैनेजर जैसी नौकरियां छोड़कर यंग्स्टर्स इस ओर बढ़ रहे हैं। इसी कड़ी में Vipin Rao Yadav का नाम भी जुड़ गया है|

हरियाणा के रहने वाले Vipin Rao ने कम्प्यूटर साइंस से बीएससी किया लेकिन आगे कोई और कोर्स या नौकरी करने के बजाय उन्होनें खेती को चुना। कुछ नया सीखने की चाहत और अपनी मेहनत करने की आदत पर भरोसा करके 18 साल के विपिन ने एक नए तरीके की खेती को अपना बिज़्नेस बना लिया।

गुड़गांव में रहने वाले Vipin ने बताया कि एक दिन उन्हें पता चला कि उनके इलाके के पास वाले Agricultural Science Center में हाइड्रोपोनिक्स के जरिए खेती करने की ट्रेनिंग दी जा रही है। उन्होनें वहां से 1 पालीहॉउस कंस्ट्रक्शन में 1 महीने की ट्रैनिंग ली| इस ट्रैनिंग के बाद उनको एग्रीकल्चर स्किल काउंसिल ऑफ़ इंडिया से भी प्रमाणपत्र मिला। इसका यह पहला बैच था जिसमें 200 घंटे की ट्रेनिंग दी गई थी। इस बैच में 20 लोग थे|

Vipin Rao Yadav
Photo : internet

Vipin Rao बताते हैं कि इसके बाद अपना खुद का बिज़्नेस करने के लिए उन्होंने अपने इकट्ठे किए हुए पैसों को लगाया| शुरुआत मेंउन्होनें 100 स्क्वॉयर फीट की जगह पर ग्रीन हाउस लगाया और इसमें खेती शुरू की, जिस ग्रीन हाउस पर लगभग 1 लाख रुपये का खर्च आया। विपिन ने यह छोटा ग्रीनहाउस अपने घर में ही शुरू किया और फूलों के साथ सब्जियों और औषधीय पौधों को उगाना शुरू किया। उनका घर शहर के पास है इसलिए उन्होंने फूलों की खेती को ज़्यादा महत्व दिया|

Vipin Rao Yadav
Photo : internet

Vipin Rao ने बताया कि फिलहाल वह 800 स्क्वॉयर फीट जमीन पर हाइड्रोपोनिक्स से खेती कर रहे हैं। वह इसमें लेट्यूस, पार्सले, सेलरी आदि की खेती करते हैं।उन्होनें बताया कि हाइड्रोपोनिक्स की यूनिट लागने में ढाई से तीन लाख रुपये का वन टाइम इनवेस्टमेंट है और उसके बाद दो से ढाई हज़ार रुपये| वह बताते हैं कि एक साल में इस फसल पर लगभग 80 से 90 हज़ार रुपये का खर्च आता है और अगर सही भाव मिल जाए तो लागत निकालकर साल में 1 लाख से 1.50 लाख का मुनाफा हो जाता है। वह बताते हैं कि क्योंकि वो गुड़गांव में रहते हैं, तो इस तरह की फसल यहां साइबर हब, डीएलएफ आदि की दुकानों में आराम से बिक जाती है और इसका अच्छा दाम भी मिल जाता है|

Vipin Rao Yadav
Photo : internet

Hydroponics यानि मिट्टी रहित खेती करने के लिए वह कोकोपिट का इस्तेमाल करते हैं। कोकोपिट को बनाने में नारियल के रेशों का इस्तेमाल होता है। कोकोपिट में वह सभी पोषक तत्व होते हैं जिनकी फसल को ज़रूरत होती है। इसमें कोकोपिट, वर्मीकोलाइट और परलाइक को 3:1:1 के रेशियो में मिलाते हैं और इसे हाइड्रोपोनिक्स प्लांट की प्रो ट्रे में डालते हैं। एक प्रो ट्रे में 120 होल्स होते हैं यानि 120 पौधे एक प्रो ट्रे में लग जाते हैं|

Vipin Rao दो साल से हाइड्रोपोनिक्स तरीके से खेती कर रहे हैं। वह बताते हैं कि उनके पापा पारंपरिक तरीके से खेती करते हैं। पारंपरिक खेती में कई बार मौसम की मार से फसल खराब हो जाती है लेकिन हाइड्रोपोनिक्स में ऐसा नहीं होता है| अपने भविष्य की योजना बताते हुए वह कहते हैं कि इस हाइड्रोपोनिक तकनीक के ज़रिए वो फूल और सब्जियों की खेती करेंगे। इसके अलावा वह हॉर्टीकल्चर यानि बागवानी में भी लैंडस्केप का काम कर रहे हैं|

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