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वंचित जनजातियों की सेवा के लिए इस IIT professor ने छोड़ी जॉब

Professor Alok Sagar एक ex-IIT professor हैं, जो कि अब Madhya Pradesh के एक गाँव की जनजातियों के साथ रहते हैं| उन्होनें 1982 में अपनी जॉब छोड़ दी और तब से इन underprivileged लोगों की सेवा कर रहे हैं| वह समझ चुके थे कि उन लोगों की समस्या बहुत बड़ी है, इसलिए उन्होनें शहर की अपनी ऐशो-आराम की ज़िंदगी त्यागकर उनका हिस्सा बनने का मन बना लिया और उनके साथ रहकर उन्हीं की ज़िंदगी जीने लगे| उन्होनें अपनी Bachelor’s और Master degree IIT Delhi और PhD Houston University,Texas से ली| IIT Delhi में पढ़ाते हुए Professor Alok Sagar ने कई रत्न खोजे, जिसमें हमारे पूर्व-RBI Governor Raghuram Rajan भी शामिल हैं|

Alok Sagar
Photo : indianexpress.com

Alok Sagar मध्या-प्रदेश के एक पिछड़े गाँव Kochamu में 750 जनजातियों के साथ रहते हैं| ऐसा गाँव जो अभी तक technology के चमत्कार से लाखों दूर है, जहाँ बिजली और सड़कें नहीं हैं और जहाँ केवल एक प्राइमरी स्कूल है| पिछले 35 सालों से वह Madhya Pradesh के Betul और Hoshangabad districts के लोगों के लिए काम कर रहे हैं| लोगों को बीज़ देकर उन्हें ज़्यादा से ज़्यादा पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करते हैं| Alok अब तक 50,000 से ज़्यादा पेड़ इस इलाक़े में लगा चुके हैं| उनका मानना है कि लोग अपने देश के लिए तभी कुछ कर सकते हैं जब वह इसकी मिट्टी से जुड़े रहें|

IIT professor
Photo : manatelanganaa.in

Alok बेतुल में हुए last election’s campaigns से अपना low profile status maintain करते आ रहे हैं| डिस्ट्रिक्ट की लोकल authorities को उनको पर शक हुआ, जिसकी वजह से उन्हें अपनी सच्चाई बतानी पड़ी कि वह उस इलाक़े के लोगों की भलाई करना चाहते हैं| यह ex-IIT professor Patparganj, Delhi का रहने वाला है| उनके पिता एक IRS officer और माँ Miranda House, Delhi University में एक physics teacher थीं| उनका भाई भी IIT Delhi में professor है|

Alok Sagar
Photo : kenfolios.com

Alok Sagar ने इस काम के प्रति जो निष्ठा दिखाई है वो सच में प्रशंसनीय है| लोगों से बात करने के लिए उन्होनें जनजाति बोलियाँ भी सीखीं| इसके अलावा उन्हें कई अन्य भाषाओं का ज्ञान भी है| तीन-जोड़ी कुर्ते और एक साइकल, जो कि वह बीज़ लाने और लोगों में बाँटने के काम में लाते हैं, वही उनकी भौतिक संपत्ति है|

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